Satish Shah एक प्रसिद्ध भारतीय हास्य अभिनेता थे, जिन्होंने भारतीय सिनेमा और टेलीविजन में लगभग पाँच दशकों तक अपनी कला से दर्शकों का मनोरंजन किया। उनका जन्म 25 जून 1951 को मांडवी, कच्छ, गुजरात में हुआ था। उन्होंने अपनी शुरुआती शिक्षा मुंबई के सेंट जेवियर्स कॉलेज से पूरी की और बाद में फिल्म एंड टेलीविजन इंस्टिट्यूट ऑफ इंडिया (FTII) से अभिनय में प्रशिक्षण प्राप्त किया।

Satish Shah प्रारंभिक जीवन और शिक्षा
Satish Shah का परिवार कच्छी गुजराती था। उन्होंने मुंबई में सेंट जेवियर्स कॉलेज से पढ़ाई की, जहां उन्हें नाट्यकला में गहरा लगाव हुआ। उन्होंने FTII में प्रवेश लिया, जहां से 1976 में स्नातक की उपाधि प्राप्त की।
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फिल्म और टेलीविजन करियर
Satish Shah ने अपना फिल्मी सफर 1978 में फिल्म अर्विंद देसाई की अजीब दास्तान से शुरू किया। लेकिन उन्हें असली पहचान 1983 में आई फिल्म जाने भी दो यारों में भ्रष्ट लेकिन हास्यस्पद नगरपालिका कमीशनर डी’मेलो के किरदार से मिली। इसके बाद उनका नाम 1984 की दूरदर्शन की लोकप्रिय टेलीविजन सीरीज़ यह जो है जिंदगी से हुआ, जिसमें उन्होंने 55 एपिसोड में 55 अलग-अलग किरदार निभाए, जो उनके अभिनय की बहुमुखी प्रतिभा का प्रमाण था।
1995 में, उन्होंने जी टीवी के शो फिल्मी चक्कर में प्रमुख भूमिका निभाई, जहाँ उनकी सह-कलाकार ऋताना पाठक शाह थीं। 2004 में आए लोकप्रिय टीवी शो साराभाई वर्सेस साराभाई में उन्होंने इन्द्रवदन साराभाई का किरदार निभाकर दर्शकों के दिलों में एक खास जगह बनाई। इसके अतिरिक्त, उन्होंने बॉलीवुड की कई सफल फिल्मों जैसे काल हो ना हो (2003), मैं हूँ ना (2004), फ़ना (2006) और ओम शांति ओम (2007) में भी अभिनय किया।
हास्य में योगदान और पुरस्कार
Satish Shah को भारतीय हास्य के क्षेत्र में एक प्रतिष्ठित नाम माना जाता है। उन्होंने 2008 में लोकप्रिय कॉमेडी शो कॉमेडी सर्कस के जज के रूप में भी काम किया। 2015 में उन्हें भारतीय फिल्म और टेलीविजन संस्थान (FTII) की सोसाइटी का सदस्य नियुक्त किया गया, जो उनके योगदान को सम्मानित करता है। उन्हें कई पुरस्कार मिले, जिनमें भारतीय टेलीविजन अकादमी पुरस्कार और इंडियन टेली अवॉर्ड्स शामिल हैं।
Satish Shah का नाम मुख्य रूप से हास्य किरदारों के लिए प्रसिद्ध है, लेकिन वे एक अच्छे नाट्य कलाकार भी थे, जिन्होंने गंभीर भूमिकाओं में भी अपनी छाप छोड़ी। उन्होंने फिल्म, थिएटर और टीवी में कई तरह के पात्र निभाए, जो दर्शकों के बीच बेहद लोकप्रिय हुए।
उनकी सबसे चर्चित भूमिका 1980 के दशक के टीवी शो साराभाई वर्सेस साराभाई में इन्द्रवदन साराभाई की थी। इस शो में उनका हास्यात्मक अभिनय और संवाद बोलने का तरीका दर्शकों के दिलों को छू गया। इसी शो ने उन्हें घर-घर में पहचान दिलाई।
Satish Shah ने बॉलीवुड की कई सुपरहिट फिल्मों में भी काम किया, जिनमें जाने भी दो यारों, काल हो ना हो, मैं हूँ ना और ओम शांति ओम प्रमुख हैं। खास बात यह है कि उन्होंने हर भूमिका को अपनी खास छाप के साथ निभाया, चाहे वह छोटी हो या बड़ी।
वह अपने काम के प्रति बहुत समर्पित थे और उन्हें अभिनय के प्रति गहरा जुनून था। कॉमेडी के अलावा, उन्होंने नाटकीय रोल्स भी किए, जो उनके अभिनय की विविधता को दर्शाता है।
Satish Shah न केवल अपने व्यावसायिक जीवन के लिए सम्मानित थे, बल्कि वे एक दयालु और मिलनसार इंसान के रूप में भी जाने जाते थे। उनकी सहजता और विनम्रता ने उन्हें सहयोगियों और प्रशंसकों के बीच बेहद लोकप्रिय बनाया।
व्यक्तिगत जीवन और निधन
सतीश शाह की शादी मधु शाह से हुई थी। वे 25 अक्टूबर 2025 को मुंबई में स्वर्ग सिधार गए। उनके निधन से भारतीय मनोरंजन जगत में एक बड़ी क्षति हुई है।
Satish Shah अपनी अद्भुत कॉमिक टाइमिंग, बहुमुखी प्रदर्शन और मधुर व्यक्तित्व के लिए सदाबहार याद रखे जाएंगे। उन्होंने हिंदी सिनेमा और टेलीविजन में हास्य की नई परिभाषाएँ गढ़ीं और अपनी विरासत अमर कर दी। उनके योगदान को हमेशा याद किया जाएगा।
यह जीवन परिचय उनके आलोचनात्मक और दर्शकीय प्रेम के लिए समर्पित है, जिन्होंने सतीश शाह के अद्भुत सफर को देखा और सराहा है।